पटना के गर्दनीबाग में रात गहराती रही, लेकिन केवाईपी केंद्रों की बहाली की मांग लेकर बैठे आंदोलनकारियों का संकल्प कायम रहा। ‘केवाईपी बचाओ महाआंदोलन 2.0’ के तहत जारी भूख हड़ताल के दूसरे दिन की देर रात करीब 11 बजे की तस्वीरें संघर्ष की स्थिति बयां करती हैं। कोई कंबल ओढ़कर बिछावन पर लेटा दिखता है, तो कुछ साथी बैठकर चर्चा करते नजर आते हैं। आयोजकों के अनुसार, पांच साथी अनशन पर हैं और मांगों के समाधान तक आंदोलन जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह संघर्ष केवल केंद्रों के संचालन का नहीं, बल्कि उनसे जुड़े लोगों की आजीविका, वर्षों की मेहनत और युवाओं के कौशल प्रशिक्षण के भविष्य का भी है। उनकी अपील है कि सरकार अनशनकारियों और उनके प्रतिनिधिमंडल से जल्द बातचीत कर समाधान का रास्ता निकाले।
डॉ. आनंद रंजन झा के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन की प्रमुख मांग बिहार के सभी 1,731 पूर्व संचालित कुशल युवा कार्यक्रम केंद्रों को पूर्ववत चालू करना और पुराने केवाईपी पाठ्यक्रम को बहाल करना है। उपलब्ध समाचार कटिंग के अनुसार, इन मांगों को लेकर मिशन निदेशक को ज्ञापन सौंपा गया है तथा प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री तक मांगपत्र भेजा गया है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि पुराने केंद्रों के बंद होने से संचालकों की आजीविका प्रभावित हुई है और प्रशिक्षण की निरंतरता कमजोर पड़ी है। उनका यह भी कहना है कि केवल 871 केंद्रों पर ‘डिजिटल मित्र’ पाठ्यक्रम शुरू करने की प्रस्तावित व्यवस्था से शेष पुराने केंद्रों का भविष्य अनिश्चित बना हुआ है। डॉ. झा ने युवाओं के भविष्य और केंद्रों से जुड़े परिवारों की स्थिति को ध्यान में रखते हुए शीघ्र निर्णय लेने की अपील की है। आंदोलन पक्ष की मांग है कि संबंधित विभाग की भूमिका की निष्पक्ष समीक्षा हो और केंद्रों की बहाली पर स्पष्ट निर्णय लिया जाए।
इस बीच आंदोलन की ओर से प्रदेशभर के केवाईपी केंद्र संचालकों, कोऑर्डिनेटरों, लर्निंग फैसिलिटेटरों और प्रशिक्षणार्थियों से एकजुट समर्थन का आह्वान किया गया है। अपील में कहा गया है कि जो साथी अब तक नहीं जुड़ सके हैं, वे गर्दनीबाग पहुंचकर अनशनकारियों का हौसला बढ़ाएं और साझा मांगों को मजबूती दें। रातभर धरनास्थल पर मौजूद साथियों का संदेश है कि कुछ लोगों के भरोसे चल रहे संघर्ष को सभी प्रभावित केंद्रों की भागीदारी चाहिए। सरकार के प्रति नाराजगी जताते हुए आंदोलन पक्ष ने चेतावनी दी है कि जल्द सुनवाई नहीं होने पर मुख्यमंत्री आवास और भाजपा कार्यालय तक प्रदर्शन का विस्तार तथा पटना में व्यापक विरोध कार्यक्रम किए जाएंगे। फिलहाल उनकी प्राथमिक मांग तत्काल संवाद और ठोस समाधान है, ताकि अनशन समाप्त हो सके और पुराने केंद्रों पर प्रशिक्षण फिर शुरू हो। अनशनकारी डटे हैं; अब उनकी मांगों पर सरकार के निर्णय का इंतजार है।
बिहार
केवाईपी भूख हड़ताल 2.0: कंबलों में सिमटी रात, हक की मांग पर डटे अनशनकारी
केवाईपी बचाओ महाआंदोलन 2.0 | दूसरी कड़ी। गर्दनीबाग में भूख हड़ताल का दूसरा दिन पूरा; सभी 1,731 पुराने केंद्रों और केवाईपी पाठ्यक्रम की बहाली की मांग, प्रदेशभर के संचालकों से समर्थन की अपील।