श्री रविन्द्र प्रसाद वर्मा की पत्नी बिंदेश्वरी देवी के निधन से परिवार, रिश्तेदारों और परिचितों में गहरा शोक है। 1 जनवरी 1953 को जन्मीं बिंदेश्वरी देवी का 12 अक्टूबर 2026 को 73 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके जाने से परिवार ने स्नेह, अपनत्व और भावनात्मक संबल देने वाली एक ऐसी सदस्य को खो दिया है, जिनकी जगह कोई दूसरा नहीं ले सकता।
परिवार से मिली जानकारी के अनुसार, शनिवार को बारहवीं का संस्कार संपन्न हुआ। आज रविवार, 25 अक्टूबर को तेरहवीं के अवसर पर पारिवारिक परंपरा के अनुसार पीपल में जल अर्पित करने के साथ श्राद्ध संबंधी कार्यक्रमों का समापन किया जाएगा। यह अवसर परिवार के लिए उनकी स्मृतियों को संजोने और उनके प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करने का है।
बिंदेश्वरी देवी अपने पीछे पति रविन्द्र प्रसाद वर्मा, इकलौते पुत्र मृत्युंजय कुमार तथा चार पुत्रियों—नीलकमल, रानी शेखर, पूनम कुमारी और स्वीकृति कुमारी का भरा-पूरा परिवार छोड़ गई हैं। उनकी सभी संतानें विवाहित हैं। बच्चों और अगली पीढ़ी के साथ उनका स्नेहपूर्ण जुड़ाव परिवार की यादों का अभिन्न हिस्सा बना रहेगा।
परिवार में किसी बड़े सदस्य की उपस्थिति केवल रिश्ते तक सीमित नहीं होती। उनका साथ, आशीर्वाद और रोजमर्रा के छोटे-छोटे पलों में मिलने वाला अपनापन पूरे घर को भावनात्मक रूप से जोड़े रखता है। बिंदेश्वरी देवी का निधन भी परिवार के लिए ऐसी ही अपूरणीय क्षति है। पारिवारिक अवसरों पर उनकी उपस्थिति और उनकी मुस्कान की कमी अब हमेशा महसूस होगी।
उनका बिछोह केवल घर की चौखट तक सीमित नहीं है। रिश्तेदारों, पड़ोस और सामाजिक संबंधों में भी उनसे जुड़ी यादें बनी रहेंगी। परिवार और समाज के बीच वर्षों में बने आत्मीय रिश्ते किसी व्यक्ति के चले जाने के बाद भी उसकी स्मृति को जीवित रखते हैं।
श्राद्ध के संस्कारों का समापन हो जाएगा, लेकिन बिंदेश्वरी देवी से जुड़ा स्नेह और उनकी यादों का सिलसिला बना रहेगा। परिवार के लिए उनकी स्मृतियाँ ऐसी अनमोल धरोहर हैं, जिन्हें आने वाली पीढ़ियाँ भी सम्मान के साथ संजोकर रखेंगी।
तस्वीरें: परिवार से प्राप्त। पारिवारिक समूह तस्वीर संयोजित स्मृति चित्र है।
बिहार
बिंदेश्वरी देवी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि, परिवार और समाज में हमेशा महसूस होगी उनकी कमी
73 वर्ष की आयु में बिंदेश्वरी देवी का 12 अक्टूबर को निधन हुआ था। पति रविन्द्र प्रसाद वर्मा, पुत्र मृत्युंजय कुमार और चारों पुत्रियों के लिए उनका स्नेह और स्मृतियाँ अनमोल धरोहर हैं।