रिपोर्टर: स्वरा | सीनेट न्यूज़
कुशल युवा कार्यक्रम के पूर्व संचालित 1,731 केंद्रों की बहाली और पुराने केवाईपी पाठ्यक्रम का प्रशिक्षण फिर शुरू कराने की माँग अब अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल तक पहुँच चुकी है। गर्दनीबाग में जारी केवाईपी बचाओ महाआंदोलन 2.0 के तहत सामूहिक अनशन के तीसरे दिन भी संचालक अपनी माँगों पर डटे रहे। उनका कहना है कि लंबे धरने और भूख हड़ताल के बावजूद सभी पुराने केंद्रों के भविष्य को लेकर उन्हें अब तक स्पष्ट, लिखित और समयबद्ध समाधान नहीं मिला है।
इसी बीच अनशनकारी विनय कुमार कुशवाहा की तबीयत बिगड़ने से धरनास्थल पर चिंता बढ़ गई। आंदोलनकारियों के अनुसार, साथियों ने तत्काल उनकी देखभाल और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था की। उनका आरोप है कि आवश्यकता के समय सरकारी चिकित्सा दल की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं हो सकी। उन्होंने प्रशासन से अनशन स्थल पर नियमित स्वास्थ्य जाँच और समुचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की माँग की है।
संचालकों का कहना है कि अपनी माँगों को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से बैठे लोगों का स्वास्थ्य और उनकी सुरक्षा प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए। किसी साथी की तबीयत बिगड़ना केवल धरनास्थल की घटना समझकर छोड़ देने का विषय नहीं है; यह समय पर संवाद और समाधान की आवश्यकता को और गंभीर बनाता है।
आश्वासन से आगे बढ़कर अब लिखित निर्णय चाहिए
आंदोलन में शामिल संचालकों ने सरकार और संबंधित विभाग से पूछा है कि पूर्व संचालित सभी 1,731 केंद्रों के संबंध में अंतिम कार्ययोजना क्या है। उनका संचालन किस व्यवस्था के तहत बहाल होगा, पुराने पाठ्यक्रम का प्रशिक्षण कब शुरू होगा और पहले से पंजीकृत विद्यार्थियों की पढ़ाई किस प्रकार सुनिश्चित की जाएगी?
उनका कहना है कि पूर्व में मिले आश्वासनों के बाद भी अपेक्षित बहाली नहीं होने से भरोसा प्रभावित हुआ है। अब केवल मौखिक आश्वासन से असमंजस दूर नहीं होगा। विभाग को स्पष्ट आदेश, उसके क्रियान्वयन की तारीख और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करनी होगी।
संचालकों ने सरकार पर उनकी माँगों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्रों के भविष्य को लेकर बनी अनिश्चितता का असर संचालकों के साथ प्रशिक्षकों, लर्निंग फैसिलिटेटर, कोऑर्डिनेटर और विद्यार्थियों पर भी पड़ रहा है।
केंद्रों के साथ युवाओं का प्रशिक्षण भी सवालों में
आंदोलनकारियों का कहना है कि केवाईपी मैट्रिक के बाद आगे बढ़ने की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक उपयोगी अवसर रहा है। विशेष रूप से सामान्य और सीमित आर्थिक संसाधनों वाले परिवारों के विद्यार्थियों के लिए नजदीक के केंद्र पर प्रशिक्षण मिलना महत्वपूर्ण था।
उनके अनुसार, डीआरसीसी से पंजीकरण कराने के बाद भी कई विद्यार्थी प्रशिक्षण शुरू होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। केंद्रों पर पहुँचने वाले बच्चों को जब कक्षाएँ शुरू होने की निश्चित तारीख नहीं मिलती, तो उनकी पढ़ाई और आगे की तैयारी दोनों प्रभावित होती हैं। संचालकों ने सवाल उठाया है कि युवाओं को कौशल से जोड़ने की व्यवस्था में ऐसा लंबा असमंजस आखिर क्यों बना हुआ है।
उनका कहना है कि यदि सरकार संचालन की व्यवस्था में बदलाव कर रही है, तो पुराने केंद्रों और प्रतीक्षारत विद्यार्थियों के लिए भी स्पष्ट व्यवस्था सामने आनी चाहिए। युवाओं का प्रशिक्षण कब और कहाँ होगा, इसका उत्तर उन्हें मिलना आवश्यक है।
आज शाम अथवा कल तक फैसले की माँग, आंदोलन तेज करने की चेतावनी
संचालकों ने कहा है कि आज शाम अथवा अधिकतम अगले दिन तक उनकी माँगों पर स्पष्ट निर्णय सामने नहीं आया, तो आंदोलन को अगले चरण में ले जाने की तैयारी की जाएगी। उनके अनुसार, केंद्र संचालकों, प्रशिक्षकों, सहयोगियों और विद्यार्थियों की व्यापक भागीदारी के साथ शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक आंदोलन को और मजबूत किया जाएगा।
आंदोलनकारियों की प्रमुख माँगें सभी 1,731 पूर्व संचालित केंद्रों की पूर्ववत बहाली, पुराने केवाईपी पाठ्यक्रम में प्रशिक्षण की पुनः शुरुआत, पूर्व निर्धारित प्रशिक्षण क्षमता पर स्पष्ट निर्णय तथा अनशन स्थल पर नियमित चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
गर्दनीबाग से उठ रही माँग अब स्पष्ट है—सरकार संवाद करे, पुराने केंद्रों के भविष्य पर अपना निर्णय बताए और उसे लागू करने की समयसीमा दे। अनशन पर बैठे लोगों की स्वास्थ्य संबंधी चिंता और प्रशिक्षण की प्रतीक्षा कर रहे युवाओं की परेशानी के बीच समाधान में देरी की कीमत बढ़ रही है। विभाग के सामने चुनौती अब केवल आश्वासन देने की नहीं, उसे जमीन पर लागू करके दिखाने की है।
बिहार
KYP बचाओ आंदोलन: भूख हड़ताल के तीसरे दिन अनशनकारी की तबीयत बिगड़ी, 1,731 केंद्रों की बहाली पर लिखित फैसले की माँग
गर्दनीबाग से केंद्र संचालकों की चेतावनी—आज शाम अथवा अधिकतम कल तक स्पष्ट निर्णय नहीं मिला तो आंदोलन अगले चरण में जाएगा; युवाओं के प्रशिक्षण और अनशनकारियों की सुरक्षा पर सरकार से जवाब माँगा।