रिपोर्टर: स्वरा | सिनेट न्यूज़
पटना, 24 अक्टूबर 2026
पटना। कुशल युवा कार्यक्रम (KYP) के 1,731 पूर्ववर्ती केंद्रों पर प्रशिक्षण बहाल करने की मांग को लेकर राजधानी के गर्दनीबाग में चल रहा आंदोलन अब भूख हड़ताल के दूसरे दिन में पहुंच गया है। आंदोलन पक्ष की ओर से उपलब्ध कराई गई वर्तमान तस्वीरों और समाचार कटिंग के अनुसार, 23 अक्टूबर को आंदोलन के 15वें दिन एक महिला समेत पाँच लोगों ने भूख हड़ताल शुरू की। नौ अक्टूबर से जारी ‘केवाईपी बचाओ महाआंदोलन 2.0’ के तहत संचालक सभी पुराने केंद्रों पर पूर्ववत प्रशिक्षण व्यवस्था बहाल करने की मांग कर रहे हैं। आंदोलन पक्ष के अनुसार अनशन अनिश्चितकालीन है।
उपलब्ध हिंदी और अंग्रेज़ी समाचार कटिंग में अनशन पर बैठे लोगों के नाम कुमारी अंबा (रोहतास), विनय कुमार कुशवाहा (सीवान), मो. शमीम अख्तर (किशनगंज), आशुतोष कुमार अंजन (मुंगेर) और दिनेश कुमार साह (वैशाली) बताए गए हैं। समाचार कटिंग के अनुसार आंदोलन के संचालक डॉ. आनंद रंजन झा के नेतृत्व में भूख हड़ताल शुरू की गई है।
इस संघर्ष के केंद्र में 1,731 पूर्ववर्ती केवाईपी केंद्रों पर प्रशिक्षण बहाल करने की मांग है। आंदोलनकारियों के मुताबिक, मामला केंद्रों के संचालन तक सीमित नहीं है। इसके साथ लर्निंग फैसिलिटेटर (एलएफ), कोऑर्डिनेटर और अन्य कर्मचारियों की आजीविका तथा प्रशिक्षण की प्रतीक्षा कर रहे विद्यार्थियों का भविष्य जुड़ा हुआ है।
9 अक्टूबर से आंदोलन, अब समाधान की प्रतीक्षा
उपलब्ध समाचार कटिंग के अनुसार, लगातार 14 दिन धरना-प्रदर्शन के बाद आंदोलन के 15वें दिन भूख हड़ताल शुरू हुई। आंदोलनकारियों का कहना है कि लंबे समय से अपनी बात रखने के बावजूद विभाग की ओर से मांगों पर ठोस सकारात्मक पहल नहीं हुई। डॉ. आनंद रंजन झा के हवाले से कटिंग में आंदोलन को शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से जारी रखने की बात कही गई है।
आंदोलन पक्ष का कहना है कि लगभग पंद्रह दिनों तक धरना देने के बाद भी उनकी प्रमुख मांग का ठोस समाधान नहीं निकला। अब उनकी अपील है कि सरकार प्रतिनिधिमंडल से तत्काल बातचीत करे और केंद्र संचालन को लेकर लिखित, समयबद्ध निर्णय सार्वजनिक करे।
आठ महीने की अनिश्चितता का आरोप
केंद्र संचालकों का आरोप है कि करीब आठ महीने से उनके केंद्रों पर नियमित नामांकन और प्रशिक्षण का काम लगभग ठप है। उनका कहना है कि इस स्थिति को लेकर उन्हें पर्याप्त पूर्व सूचना, स्पष्ट नोटिस अथवा भविष्य की संचालन व्यवस्था के संबंध में संतोषजनक जानकारी नहीं मिली। इन आरोपों पर विभाग का प्रत्यक्ष जवाब इस रिपोर्ट के लिए उपलब्ध नहीं है।
संचालकों के अनुसार, लंबे समय तक प्रशिक्षण बाधित रहने से केंद्र चलाने और कर्मचारियों को काम उपलब्ध कराने में कठिनाई बढ़ी है। उनके सामने सवाल है कि पूर्व व्यवस्था में तैयार किए गए प्रशिक्षण केंद्रों और उनसे जुड़े मानव संसाधन का आगे उपयोग किस तरह होगा। वे अनिश्चित प्रतीक्षा के स्थान पर स्पष्ट नीति और उसके क्रियान्वयन की तारीख चाहते हैं।
DRCC से पंजीकरण के बाद भी प्रशिक्षण का इंतजार
आंदोलन पक्ष से मिली जानकारी के अनुसार, कुछ विद्यार्थी जिला निबंधन एवं परामर्श केंद्र (DRCC) से पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी करने के बाद भी छह-सात महीने से प्रशिक्षण शुरू होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। वे केंद्रों पर पहुंचते हैं, लेकिन कक्षाएं कब शुरू होंगी, इसका स्पष्ट जवाब नहीं मिल पाता। प्रतीक्षारत विद्यार्थियों की कुल संख्या का सत्यापित आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
यह शिकायत प्रशिक्षण व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण कड़ी पर सवाल उठाती है: पंजीकरण कराने वाले विद्यार्थी को प्रशिक्षण तक पहुंचाने की जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होगी? यदि विद्यार्थी की प्रक्रिया पूरी है, तो उसे केंद्र, बैच और कक्षा शुरू होने की तारीख की जानकारी मिलनी चाहिए।
कौशल सीखने के उद्देश्य से पंजीकरण कराने वाले युवाओं के लिए कई महीनों की देरी उनके आगे की पढ़ाई और काम की तैयारी को प्रभावित कर सकती है। इसलिए केंद्र संचालन पर निर्णय के साथ प्रतीक्षारत विद्यार्थियों के प्रशिक्षण की अलग, स्पष्ट कार्ययोजना भी जरूरी है। 12 अक्टूबर की लल्लूराम की रिपोर्ट में भी केंद्र संचालकों के साथ विद्यार्थियों के प्रदर्शन में शामिल होने और प्रशिक्षण प्रभावित होने का उल्लेख है।
‘डिजिटल मित्र’ में 871 का आंकड़ा: स्थिति स्पष्ट करना जरूरी
विवाद के बीच कुशल युवा कार्यक्रम को ‘डिजिटल मित्र’ व्यवस्था के अंतर्गत आगे बढ़ाने की खबरें भी सामने आई हैं। अमर उजाला की पाँच अक्टूबर की रिपोर्ट में विभाग के हवाले से बताया गया है कि पहले चरण में 871 पात्र संचालकों को एक-एक केंद्र आवंटित किया जाएगा। दूसरे चरण में पहले दो या अधिक केंद्र चलाने वाले संचालकों को एक-एक अतिरिक्त केंद्र देने का प्रावधान बताया गया है।
यहां 1,731 केंद्रों और 871 संचालकों के आंकड़ों का अंतर समझना जरूरी है। दोनों को सीधे एक जैसी इकाई मानकर निष्कर्ष निकालने से स्थिति अधूरी दिखाई दे सकती है। इसी वजह से विभाग से यह स्पष्ट करने की जरूरत है कि चरणबद्ध आवंटन पूरा होने पर कितने केंद्र संचालित होंगे, पुराने केंद्रों का समायोजन कैसे होगा और विद्यार्थियों की प्रशिक्षण क्षमता पर क्या असर पड़ेगा।
केंद्र संचालकों की मुख्य चिंता है कि पूर्ववर्ती केंद्रों को काम करने का अवसर और विद्यार्थियों को प्रशिक्षण की निरंतरता मिले। नई व्यवस्था को लेकर पात्रता, आवंटन, क्षमता और समयसीमा की स्पष्ट जानकारी सामने आने से इस अनिश्चितता को दूर करने में मदद मिल सकती है।
पहले आंदोलन के बाद आश्वासनों पर उठे सवाल
केवाईपी केंद्रों से जुड़ा विरोध इससे पहले भी सामने आ चुका है। हिन्दुस्तान की एक सितंबर की रिपोर्ट में केंद्रों के नवीकरण, नामांकन और प्रशिक्षण की बहाली तथा लंबित भुगतान की मांग पर भूख हड़ताल का उल्लेख है। इससे स्पष्ट है कि संचालकों की शिकायतें केवल वर्तमान धरने के दौरान सामने नहीं आई हैं।
मौजूदा आंदोलन से जुड़े संचालकों का आरोप है कि पहले आंदोलन के दौरान सभी पुराने केंद्रों को चालू करने का भरोसा दिया गया था, लेकिन अपेक्षित बहाली नहीं हुई। वे इसे आश्वासन पूरा नहीं होने का मामला बताते हैं। पूर्व वार्ता में वास्तव में क्या सहमति बनी थी और उसके बाद कौन-सी कार्रवाई हुई, यह संबंधित पत्रों तथा कार्यवाही के विवरण से स्पष्ट होना चाहिए।
केंद्र संचालकों का कहना है कि इस बार उन्हें मौखिक भरोसे के साथ ऐसा लिखित निर्णय चाहिए, जिसके आधार पर वे विद्यार्थियों, प्रशिक्षकों और कर्मचारियों को आगे की स्थिति बता सकें।
रोजगार और प्रशिक्षण—दोनों पर असर
केवाईपी केंद्र के साथ संचालक के अलावा प्रशिक्षण देने वाले एलएफ, बैच और विद्यार्थियों का समन्वय करने वाले कोऑर्डिनेटर तथा अन्य कर्मचारी जुड़े रहते हैं। काम बाधित होने की शिकायत का असर इस पूरी व्यवस्था पर पड़ता है। आंदोलन पक्ष इसी कारण इसे केंद्र संचालकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों का साझा मुद्दा बता रहा है।
राज्य में कौशल प्रशिक्षण बढ़ाने के लक्ष्य के बीच उपलब्ध केंद्रों और प्रशिक्षित कर्मचारियों के भविष्य पर अस्पष्टता दूर करना जरूरी है। किसी भी बदलाव का आकलन इस आधार पर भी होना चाहिए कि युवाओं को प्रशिक्षण कितनी जल्दी, कितनी क्षमता के साथ और कितनी आसानी से उपलब्ध होगा।
पोस्टर में चार प्रमुख मांगें
आंदोलन पक्ष के उपलब्ध कराए गए पोस्टर में सभी 1,731 केवाईपी केंद्रों की पुनर्बहाली, पूर्ववर्ती केवाईपी पाठ्यक्रम का प्रशिक्षण दोबारा शुरू करने, प्रति केंद्र प्रति तिमाही 120/180 की प्रशिक्षण क्षमता बहाल करने और बंद अवधि का उचित मुआवजा देने की मांग दर्ज है। केंद्र संचालक चाहते हैं कि केंद्रों के भविष्य के साथ प्रशिक्षण की क्षमता और बंद अवधि से जुड़े आर्थिक प्रश्नों पर भी स्पष्ट निर्णय हो।
संवाद, स्पष्ट आदेश और प्रशिक्षण बहाली की जरूरत
इस विवाद के समाधान के लिए कुछ प्रश्नों का स्पष्ट उत्तर आवश्यक है। सभी 1,731 पूर्ववर्ती केंद्रों की वर्तमान स्थिति क्या है? किन केंद्रों पर नामांकन और प्रशिक्षण बाधित है तथा क्यों? डिजिटल मित्र व्यवस्था में पुराने केंद्रों और संचालकों के लिए अवसर क्या होंगे? पंजीकरण करा चुके विद्यार्थियों की कक्षाएं कब और कहां शुरू होंगी? पूर्व आंदोलन के दौरान दिए गए आश्वासनों पर क्या कार्रवाई हुई?
इन प्रश्नों पर विभाग का सार्वजनिक स्पष्टीकरण और आंदोलनकारियों से सार्थक संवाद समाधान का रास्ता खोल सकता है। अनशन पर बैठे लोगों के स्वास्थ्य की निगरानी और बातचीत में तात्कालिकता भी आवश्यक है।
इस रिपोर्ट के लिए संबंधित विभाग का प्रत्यक्ष पक्ष उपलब्ध नहीं है। डिजिटल मित्र की चरणबद्ध व्यवस्था के बारे में जानकारी प्रकाशित समाचारों में विभाग के हवाले से दी गई है। बिना नोटिस काम बंद होने, आठ महीने की अवधि और पूर्व आश्वासनों से जुड़े आरोपों पर विभाग का विस्तृत जवाब सामने आना बाकी है।
गर्दनीबाग से उठ रही मांग के केंद्र में एक सीधा सवाल है—युवाओं की कौशल कक्षाएं फिर कब चलेंगी? सरकार के सामने अवसर है कि वह केंद्र संचालकों की शिकायतें सुने, कर्मचारियों की स्थिति स्पष्ट करे और विद्यार्थियों के प्रशिक्षण की तारीख तय करे। लिखित निर्णय और उसका समय पर पालन ही इस लंबे इंतजार को खत्म कर सकता है।
बिहार
KYP बचाने को धरने के बाद भूख हड़ताल का दूसरा दिन: 1,731 केंद्रों की बहाली और युवाओं का प्रशिक्षण शुरू करने की मांग
गर्दनीबाग में एक महिला समेत पाँच लोग अनशन पर; केंद्र संचालकों, एलएफ और कोऑर्डिनेटरों की आजीविका के साथ विद्यार्थियों के भविष्य का सवाल; सरकार से तत्काल संवाद की अपील